अपना जिलादेवास

देवास सिटी ट्रांसपोर्ट में करोड़ों की अनियमितता का आरोप, लोकायुक्त जांच के बाद न्यायालय में अभियोजन की मांग


देवास। सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड में बस संचालन, सब्सिडी वितरण और रूट परिवर्तन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पुलिस लोकायुक्त द्वारा की गई जांच के आधार पर प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी, देवास के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर तत्कालीन अधिकारियों को आरोपी बनाए जाने की मांग की गई है।
लोकायुक्त जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि देवास सिटी ट्रांसपोर्ट में पदस्थ अधिकारियों द्वारा निजी ऑपरेटरों के साथ मिलीभगत कर पद का दुरुपयोग किया गया, जिससे शासन को राजस्व हानि पहुंची और निजी ट्रांसपोर्टरों को अनुचित आर्थिक लाभ मिला।
जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बसों के रूट परिवर्तन बिना बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की स्वीकृति के कर दिए गए। निर्धारित क्लस्टर के बजाय बसों को अधिक लाभकारी मार्गों पर चलाया गया। कुछ बसों का संचालन निजी ट्रांसपोर्ट कंपनी के नाम पर किया गया, जबकि वास्तविक संचालन अन्य निजी ऑपरेटरों द्वारा किया जाता रहा।
लोकायुक्त रिपोर्ट के अनुसार, पांच पुरानी बसों को बेचने की अनुमति के बाद भी एक वर्ष से अधिक समय तक नई बसें नहीं खरीदी गईं। इसके बावजूद संबंधित बसों पर शासन द्वारा लगभग 23 लाख 86 हजार 800 रुपये की सब्सिडी जारी की गई, जिससे शासन को सीधी आर्थिक क्षति हुई।
सब्सिडी घोटाले के आरोप
जांच में यह भी पाया गया कि बिलों और इनवॉइस का विधिवत मिलान किए बिना फर्जी एवं बढ़ी-चढ़ी राशि के बिलों को स्वीकृति दी गई। उदाहरण के तौर पर 100 रुपये मूल्य के उपकरण का बिल 150 रुपये दर्शाया गया, जिस पर उसी अनुपात में सब्सिडी स्वीकृत कर दी गई। इससे शासन और आम जनता को आर्थिक नुकसान पहुंचा।
अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
लोकायुक्त जांच में तत्कालीन सीईओ विशाल सिंह चौहान, सीओओ प्रदीप सोनी एवं अन्य सूर्यकांत तिवारी इन अधिकारियो की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि अधिकारियों ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर निजी ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को लाभ पहुंचाया तथा नियमों के विरुद्ध निर्णय लिए। बसों के संचालन में अनियमितता पाए जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
न्यायालय से अभियोजन की मांग
फरियादी धर्मेंद्र सिंह चौहान द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत आवेदन में मांग की गई है कि लोकायुक्त जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित अधिकारियों को आरोपी बनाकर उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में अभियोजन स्वीकृत किया जाए। मामले में अन्य तर्क मौखिक रूप से भी माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगी।
इधर शिकायत कर्ता धर्मेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो हम इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाएंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button